डुगडुगी बजी अलिप बिन .. मई अर्थ दूंडताहू ...
काफिला बने शब्द बिन ........ मई काफिर को खोजताहू........
जुमला बने शास्त्र बिन .... मई निष्पत्ति दूंडताहू ....
हवा के तन पे सिलवटे फ़र्ज़ बिन .... मई मुखबिरी खोजताहू ...
सच बंधे जब अर्थ में
पल बंधे जब सार्थ में
कल बंधे जब स्वप्नमे ...
.... सैलाब के खुद अंतमे ..... अनंत का फैलब दूंडताहू ....
उठा- जगा हु मई अभी
पल सोया था 'मई'. तभी ... .
अचंबित भर्ग से मिल अभी ....
पा पराक्रत खुद सभी .. 'अब' की अंगडाई बन आख मूँदताहु ...
(पराकृत -प्राकृत )
काफिला बने शब्द बिन ........ मई काफिर को खोजताहू........
जुमला बने शास्त्र बिन .... मई निष्पत्ति दूंडताहू ....
हवा के तन पे सिलवटे फ़र्ज़ बिन .... मई मुखबिरी खोजताहू ...
सच बंधे जब अर्थ में
पल बंधे जब सार्थ में
कल बंधे जब स्वप्नमे ...
.... सैलाब के खुद अंतमे ..... अनंत का फैलब दूंडताहू ....
उठा- जगा हु मई अभी
पल सोया था 'मई'. तभी ... .
अचंबित भर्ग से मिल अभी ....
पा पराक्रत खुद सभी .. 'अब' की अंगडाई बन आख मूँदताहु ...
(पराकृत -प्राकृत )
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